If God comes roll-calling on the internet, and the way it is going, She/He certainly may, I must not be absent. And therefore, this blog is my proxy herein.

Do let me know, if you want me to stop doing this to the human-kind (/unkind). Or, rarer still, if you want me to do more of the same.

(And ah, while you are here, do feed the fish. They like mouse pointers.)

Friday, August 27, 2010

नेताजी की चेतावनी

नेताजी बन चले कवि
सुनने में आया अभी अभी |
निराला दिनकर को ललकार है
बस एक टॉपिक की उनको दरकार है ||

उननें कौम्युनिज्म पर ऐसे लेख़ लिखे
मार्क्स - स्टालिन है fake दिखे |
लिब्रेलाईजेशन पर ऐसा डिबेट डाला
मनमोहन को याद आई अपनी ख़ाला ||

अब संसद घेरने की तैयारी है
सो आई कविता की बारी है |
सोंचा छंदों से वोट टटोलें
हमे देख नेताजी बोले -

"मसले में बस ज़रा दर्द हो
सुनते ही रुहें सर्द हो|
ऐसी भी उसमे कुछ बात हो
बड़ा बखेडा और विवाद हो ||

सब्जेक्ट rural हेल्थ हो
या भैया कॉमनवेल्थ हो |
चलेगा वैसे नक्सलवाद जी
या दंगा आतंकवाद भी ||"

कलम लिए पोस्टर छपवाए
दूसरों से दीवारों पे स्लोगन लिखवाए -
"शेक्सपियर ये, आंधी है
बुद्धिजीवियों का गाँधी है ||"

ज़बरन बुक डील्स भी हुई साईन
सो पब्लिशर्स ने धरा दिया deadline |
बेशक केंद्र से allot भी हुआ फंड
और educational दौरों का दौर हुआ बुलंद ||

धीरे धीरे बुक रिलीज़ का आया दिन
नेताजी की कविता ठहरी, सो थी अंतहीन |
ऑफिस की छिटकिनियाँ अन्दर से बंद, सुरक्षा विशेष
बाहर बोर्ड लगा, "For your better tomorrow. Work in Progress" ||